Thursday, 29 July 2010

एस्ट्रिक्स और ज्योतिषी


जहाँ तक मुझे याद है, हिंदी में कुल मिला कर मात्र ६ एस्ट्रिक्स प्रकाशित हुए थे| मेरा परिचय एस्ट्रिक्स  से हिंदी के ही माध्यम से हुआ है| सबसे पहली हिंदी एस्ट्रिक्स थी, "एस्ट्रिक्स ओलिंपिक खेलों में", जिसने मुझे इस पात्र का आजीवन दीवाना बना दिया| मुझे याद है कोई अगस्त या सितम्बर १९८२ की बात है, एक दुकान पर इंद्रजाल और कुछ अमर चित्र कथा खरीद रहा था| पास में कुछ  इंगलिश एस्ट्रिक्स भी थी, जिनकी कीमत कोई ५० रूपये और साथ में ही हिंदी ५ रूपये मात्र की| उठा कर  देखा,  कागज साधारण लेकिन कॉमिक मजेदार लगी| खरीद कर घर लाया, कितनी बार पढ़ा होऊंगा, कह नहीं सकता| फिर शुरू हो गयी हर अगले अंकों की तलाश|

अनुराग भाई के पास उपलब्ध पांच में से  तीन पहले ही पोस्ट कर चूका हूँ | आज प्रस्तुत है एक और  विरल  हिंदी  एस्ट्रिक्स:  "एस्ट्रिक्स और  ज्योतिषी"| संवादों का अनुवाद प्रसंसनीय है|
  • १९७२ - मूल प्रकाशन  फ्रांसीसी भाषा में और मूल श्रृंखला में उन्नीसवीं (अब तक केवल ३४) कॉमिक
  • १९८३ - हिन्दी एस्ट्रिक्स श्रृंखला में तीसरी कॉमिक का एकमात्र हिंदी प्रकाशन
यह कहानी है एक ऐसे प्रपंची की जो एक ज्योतिषी (भविष्यवक्ता) का ढोंग कर सीघे-साधे गालवासियों से खूब पैसा बनाता है| कुछ समय तक "बांटो और राज करो" नीति सफल होती है| लेकिन अपनी ही करणी का फल पहले से भी बुरी तरह भुगतता है, और जहाँ  एस्ट्रिक्स महाशय हों - कुछ और भी हो सकता था क्या? बोया  पेड़  बबूल  का , आम  कहाँ  से  खाय|

Saturday, 10 July 2010

मुर्खता दिवस ( Single Iznogoud Comics Printed in Hindi)

एक खुशखबरी  है: अपने रफ़ीक भाई - जो पिछले साल से  पतिश्री की सफल भूमिका अदा कर रहे  हैं, ७ जुलाई २०१० से  पिताश्री की  भूमिका को  भी बहादुरी के साथ निभाना शुरू कर दिया है| पुत्ररत्न का नाम वो खुद ही समय आने पे बताएँगे|
मेरी  ऊपरवाले से पार्थना है कि "छोटे रफ़ीक" खलीफा हारून की तरह  सौम्य और  सौभाग्यशाली नायक हों, जिनपे Iznogoud स्वरूप  लोगों की बुरी नियत से तनिक भी आंच ना आये|
हम सभी की तरफ से उनके सम्पूर्ण परिवार को हार्दिक बधाइयाँ! 




इस खुशी के पल में प्रस्तुत है,  अनुराग भाई के अनमोल खजाने से एक अति दुर्लभ कॉमिक: 
हिंदी में एकमात्र प्रकाशित  Iznogoud कॉमिक - मुर्खता दिवस


इस किरदार के लेखक   Rene  Goscinny कृत  Astérix और Lucky Luke को कौन नहीं जानता है|  वैसे तो अभी तक मात्र २८ फ्रेंच में छपे हैं|  भारतवर्ष में १२ अंग्रेजी में उपलब्ध हैं,  १२ और भी जल्दी ही आने वाले हैं| लेकिन न इससे पहले, न ही इसके बाद हिंदी पाठकों को यह सौभाग्य हासिल हो पाया है| 

स्वर्गवासी रेने की तरह शायद ही कोई ऐसा कॉमिक्स लेखक है जिसके तीनों किरदार इतने  सालों बाद भी  विश्व के लोकप्रिय कॉमिक्स नायक हों|  ये किस श्रेणी की कला हैं कहने की जरुरत नहीं, इन कॉमिक्सों को किशोरों से बुजुर्ग वर्ग तक पढ़ने में तनिक भी संकोच नहीं करता |

सार: बगदाद  के बेहद ही सौम्य खलीफा Haroun El Poussah (हारून अल पौस्साह) का प्रिय प्रमुख वजीर Iznogoud है| लेकिन उसके  जीवन में एकमात्र उद्देश्य है, खलीफा हारून का पराभव और खुद ही  खलीफा बनना| 
 
वैसे तो खलीफा की नज़र में  उसका प्रमुख वजीर  हमेशा वफादार अनुयायी रहता है, लेकिन कैसे अपना ही हर दाव Iznogoud पे उल्टा बैठता है, इस सम्पूर्ण कॉमिक्स की श्रृंखला का अभिन्न अंग है| कहने  को तो कॉमिक्स है, परत्नु क्या  वास्तविकता में हम ऐसे लोंगों को अपने आस-पास नहीं पाते हैं? ;)


खैर ये कहानी फिर कभी, आज समय है ख़ुशी मनाने का|
इस श्रृंखला के  बारे में कुछ विशेष विवरण रफ़ीक भाई के ब्लॉग पे उपलब्ध है:  कृपया यहाँ क्लिक करें